Inspirational
हालातों की सीख़ - मन की बात नेहा के साथ
"जब परिस्तिथिया हमारे अनुकूल नहीं होती तो यक़ीनन कुछ पलों के लिए कमजोर या असहाय…
"जब परिस्तिथिया हमारे अनुकूल नहीं होती तो यक़ीनन कुछ पलों के लिए कमजोर या असहाये महसूस होना स्वाभाविक है लेकिन फिर उन्ही परिस्तिथियों से उभर क…
अबला नहीं सबला "दुसरो की उलझन को सुलझाने के लिए उन्हें समझाना तो कोई भी कर लेता है, पर मुश्किल तो अपने अंदर चल रही उलझनों के लिए खुद को समझा प…
कुछ परिस्तिथिया अग्नि-परीक्षा जैसी होती है, जिन्हे पार करने की हिम्मत करनी ही पड़ती है..... कभी कभी बेहतर भविष्य कुछ अग्नि परीक्षाओं से हो कर गुजरता …
जो जैसा हमेशा से होते आया है उसे वैसे ही चलते रहने देना आसान है लेकिन मुश्किल और कठिनाई तो बदलाव को स्वीकारने में होती है और बदलाव के लिए एक पहल करना…
ज़िंदगी मुस्कुरा ही पड़ी कई बार हालात को हारता देख हम भी हारने लगते है...... और आगे के हालात सुधारने की हिम्मत भी नहीं दिखा पाते...!! परन्तु ज़िंदगी का …
बस अब और परवाह नहीं - मन की बात नेहा के साथ (part-2) कहानी के पहले भाग को को विस्तार में पढ़ने के लिए निचे दिए लिंक पर क्लिक करे........ बस अब और परवा…
बस अब और परवाह नहीं - मन की बात नेहा के साथ ये समाज, समाज के लोग, ओर लोगो के बनाये बहुत से दायरे.......... कभी कभी सही भी है लेकिन, बहुत सी परिस्तिथ…
फ़रिश्ते का रूप - मन की बात नेहा के साथ किसी की मदद करना अच्छी बात तो है ही...... लेकिन किसी की ऐसी मदद कर देना कि फिर वो किसी की मदद का मोहताज ही न र…
" बहुत बार हम खुद को दूसरे के नज़रिये के अनुसार बदलना सही समझते है !! क्या अपना नज़रिया स्वीकारना या समझना इतना मुश्किल है ....." !! 12 साल क…
जरुरी नहीं जैसा हमेशा से चलता आया है, वो आगे भी यूँ ही बढ़ाया जाए..!! बदलाव तो ज़िंदगी का अहम सच्च है | अगर बदलाव और बेहतर के लिए है तो बदलाव को अपना…
अपने ही कई पहलू से अनजान होते है हम | खुद को ही समझने में उम्र कट जाती है | हर पहलू कुछ न कुछ सीखा कर ही जाता है, और यकीनन हमें हमारे नए रूप से मिलव…
रोज़ सुबह उठ, बस घड़ी की सुइयों को भागते देख हर कोई भागने लगता है, समय के साथ चलते रहने के लिए !! हम रुक भी गए लेकिन समय चलता रहेगा !! और समय से पीछे छ…
आज नकारात्मकता (negativity) हर तरफ देखने को मिलती है| कभी कभी नकारात्मकता इतनी महसूस होती है कि स्वभाव में निराशा आ जाना स्वाभाविक है| निराशा क्यों …
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"जब परिस्तिथिया हमारे अनुकूल नहीं होती तो यक़ीनन कुछ पलों के लिए कमजोर या असहाय…
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